

भरत लाल गुप्ता
उदयपुर। मुगल काल से लोक चर्चित पारंपरिक छत्तीसगढ़ का अनाज से संबंधित त्यौहार “छेरता -लोकड़ी’ पूश जनवरी माह पूर्णिमा के दिन पूरे छत्तीसगढ़ में मनाया जा रहा है। एवं कुछ ग्राम पंचो ने शनिवार का दिन होने के कारण रविवार 4 जनवरी को प्रातः काल से ही ग्रामीण बच्चे झोला लेकर सामूहिक रूप से छेड़ता मांगने निकल पड़े हैं। वही पूरे गांव में बच्चों की छेरछेरा की सामूहिक शोर के साथ एक विशेष उत्सव का माहौल पूरे गांव में देखा गया। प्रत्येक घर में इन बच्चों के लिए धान का संग्रह कर इन्हें मुट्ठी भर धान बच्चों को दिया जाता है एवं छेेेेरता त्यौहार में अपनी सहभागिता ग्रामवासी निभा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि मे राम सिंह ,उप सरपंच खिलावन निषाद ने छेड़ता त्यौहार की बधाई सभी बच्चों को दिया है। ग्रामीण जन अपने सगे संबंधी रिश्तेदार मित्रों को छेड़ता रोटी खाने का आमंत्रण निमंत्रण भी दिए हैं! जिससे लोग एक दूसरे के यहां भाईचारे एवं सामाजिक समरसता की कड़ी में छेरता खाने आ जा रहे हैं।

मां अन्नपूर्णा माता की सम्मान में गांव के बच्चे जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है यह अन्नपूर्णा माता को रिझाने लुभाने की उत्साह के साथ धान संग्रह कर एक उत्सव का माहौल निर्मित करते हुए इस परंपरा को बखूबी अपने-अपने गांव में छेरछेरा कोठी के धान ला हेर हेरता की पारंपरिक बोल के साथ अनाज संग्रह करते बच्चे अति प्रसन्न होकर इस त्यौहार में आनंद की अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। वहीं प्रत्येक घर में गुडहा रोटी, चिपड़ी रोटी ,भजिया ,चटनी, मांस मटन, इत्यादि के साथ ही तर्पणी महाराज को भी बनाकर त्योहार आनंदपूर्वक मनाया जा रहा है। शाम होते ही बच्चे विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ लोकड़ी गीत संगीत के साथ डीजे इत्यादि कई गानों के साथ चावल पैसा की अपेक्षा से लोकड़ी खेले जा रहे हैं और अगले ही दिन प्राप्त धान चावल पैसों से एक और छेरता का आनंद अपने मनपसंद स्थान में पिकनिक जाकर इस त्यौहार को अंतिम रूप दे रहे है। इस वर्ष भी ऐसा ही कुछ आज 4 जनवरी को उदयपुर विकासखंड के अलग-अलग गांव में ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। सभी घर के मुखिया ने इन प्यारे बच्चों को छेड़ता को त्यौहार की बधाई देते हुए मां धरती से और अधिक अनाज की उत्पादन करने की प्रार्थना की है। ताकि बच्चे आगामी वर्ष में उल्लास के साथ त्यौहार को मना सके?
Author: anil sahu
जिला प्रतिनिधि सूरजपुर


