

अनिल साहू
सूरजपुर में सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल: शुक्रवार को 13 वर्षीय रिद्धिमा की मौत, शनिवार को महिला ने गंवाई जान; हादसों से दहला जिला, कार्रवाई और निगरानी की उठी मांग
सूरजपुर। जिले में गिट्टी लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दो दिनों के भीतर दो दर्दनाक हादसों में एक मासूम छात्रा और एक महिला की जान चली गई। शुक्रवार को विश्रामपुर में 13 वर्षीय रिद्धिमा जैन की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, वहीं शनिवार को चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के कुबेरपुर में चंद्रावती जायसवाल की मौत से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था, वाहन चालकों की जिम्मेदारी और संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल से घर लौट रही थी मासूम, ट्रैक्टर की चपेट में आई जिंदगी
16 अक्टूबर को विश्रामपुर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर ग्राम पंचायत केशवनगर के बड़कापारा में दर्दनाक हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, सूरजपुर नवापारा निवासी एलआईसी एजेंट पंकज कुमार जैन अपनी 13 वर्षीय बेटी रिद्धिमा जैन के साथ स्कूल में आयोजित पैरेंट्स मीटिंग से बाइक पर घर लौट रहे थे। इसी दौरान गिट्टी लदे ट्रैक्टर के पास से गुजरते समय बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में रिद्धिमा ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता को चोटें आईं।
घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर को हटवाकर जब्त किया। मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। मासूम की असमय मौत से परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
अगले ही दिन कुबेरपुर में दूसरा हादसा, ग्रामीणों का गुस्सा सड़क यह

विश्रामपुर हादसे का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि शनिवार को चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के कुबेरपुर में एक और दर्दनाक घटना सामने आई। जानकारी के मुताबिक, चंद्रावती जायसवाल स्कूटी से पूजा का सामान लेकर घर लौट रही थीं। इसी दौरान गिट्टी लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और शव रखकर मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। घटना के दौरान क्रेशर परिसर में आगजनी की खबरें भी सामने आईं। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भी आक्रोशित भीड़ का सामना करना पड़ा। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही।
कृषि कार्य के वाहन से व्यावसायिक परिवहन, नियमों की जांच जरूरी
ट्रैक्टर का उपयोग मुख्य रूप से कृषि कार्यों के लिए किया जाता है, लेकिन कई क्षेत्रों में इनसे गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री का परिवहन भी किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संबंधित वाहन सभी आवश्यक कानूनी और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं? क्या चालकों के पास आवश्यक दस्तावेज हैं? क्या वाहनों की फिटनेस, परिवहन की अनुमति और सड़क सुरक्षा नियमों की नियमित जांच हो रही है?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच और कार्रवाई से ही सामने आ सकता है। खासकर आबादी वाले क्षेत्रों, बाजारों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी या निर्माण सामग्री से लदे वाहनों की आवाजाही को लेकर सतर्कता जरूरी है।
हादसों के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
लगातार दो दिनों में दो लोगों की मौत ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पहले से क्या इंतजाम किए जा रहे हैं?
स्थानीय स्तर पर वाहनों की नियमित जांच, लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई, संवेदनशील मार्गों पर निगरानी और नियमों के पालन को सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में गिट्टी लदे वाहनों की आवाजाही से लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, तो संबंधित विभागों को इसकी समीक्षा कर उचित कदम उठाने चाहिए।
दो दिन में दो मौतें—यह केवल हादसों का आंकड़ा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन घटनाओं से सबक लेकर ठोस कदम उठाते हैं या फिर किसी और परिवार की खुशियां उजड़ने के बाद ही व्यवस्था जागेगी।




