सूरजपुर जिले के आदिवासी छात्रावासों मे भारी अव्यवस्था से जूझ रहे बच्चे —सुश्री शशि सिंह

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सूरजपुर जिले में आदिवासी छात्रावासों में सुविधाओं का टोटा, सूरजपुर, प्रेमनगर, रामानुजनगर में भारी अव्यवस्था उजागर पर सवाल,

सूरजपुर– जिले के आदिवासी छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। छात्रावास में भारी अव्यवस्था का उस समय पता चला जब कांग्रेस कमेटी जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने सूरजपुर, प्रेमनगर, रामानुजगनर सहित क्षेत्र के अनेक छात्रावासों का निरीक्षण किया

जिसमे वर्तमान मे भवन जर्जर, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं

कांग्रेस के पदाधिकारियों व सदस्यों ने निरीक्षण उपरांत कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर छात्रावासों की व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।

जिले के दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों को रहने साथ बेहतर शिक्षा मिल सके इसके लिए जिला मुख्यालय के अलावा प्रेमनगर, रामानुजनगर सहित गई अन्य जगह आदिवासी छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। जहां बड़ी संख्या में छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। छात्रावास में बच्चों को पायल सुविधा मिले इसके लिए शासन द्वारा हर वर्ष लाखों रुपए खर्च करती है। बावजूद इसके आज भी छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है और छात्रावास में बच्चों को जो सुविधा मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रही और बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

हाल ही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने स्थित प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास तथा कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास के निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, पेयजल और आवास से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई हैं। शशि सिंह ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले को गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की टीम गठित कर छात्रावासों की जांच कराई जाए।

जिसमे प्रमुख रूप से पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन, सैनिटरी पैड, भवन मरम्मत, विद्युत व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारी के निर्माण तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं का शीघ्र निराकरण कराने की मांग की गई है।

शशि सिंह ने कहा कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। छात्रावासों में सुविधाओं की कमी से बच्चों को परेशानी हो रही है, इसलिए इन समस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए।

बंद वाटर कूलर, पेयजल के लिए परेशानी

 

जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने बताया गया है कि प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास में वाटर कूलर चालू हालत में नहीं है और पेयजल की भारी कमी है। छात्रावास में भोजन व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गई है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्राओं को दोपहर का भोजन नहीं दिया जा रहा है और नाश्ते के मेनू में भी कटौती की गई है। इसके अलावा भवन की छत से पानी टपकना, कमरों में सीलन, खाना के अस्वस्थ स्थान की कमी तथा आवासीय पढ़ाई के लिए डिजिटल बोर्ड जैसी सुविधाओं के अभाव को भी उपरांत हॉस्टल में बच्चों गया है। छात्राओं के लिए सीमित पेट्रोलियम की कमी और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में साबुन व तेल जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही गई है।

50 की क्षमता, 200 बालिकाओं के रहने का दावा

कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास को लेकर कांग्रेस ने गंभीर चिंता का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस के अनुसार 50 सीटर छात्रावास में करीब 200 बालिकाओं के रहने का दावा है। स्थिति 200 बच्चों के जर्जर स्थिति में है और प्लास्टर उखड़कर गिरने और विद्युत वायरिंग में बार-बार शॉर्ट-सर्किट की समस्या को आरोप लगाया गया है। पेयजल की कमी और वार्ड-बार बिजली कटौती के कारण छात्राओं को पढ़ाई प्रभावित होती है। वाश रूम के अभाव में बिना मेकअप की सुविधा नहीं होने और कमरों की कमी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

Aashiq khan
Author: Aashiq khan