सुशासन तिहार में भी स्वास्थ्य कर्मचारियों को नहीं मिला न्याय, अधिकारियों की मनमानी पर जेडीएस कर्मचारी का भड़का आक्रोश

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

अनिल साहू

सूरजपुर।15 मई 2026 एक ओर सरकार सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के जेडीएस कर्मचारी आज भी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सूरजपुर के आईटीआई ग्राउंड में आयोजित समाधान शिविर में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी प्रकोष्ठ संघ ने कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर जोरदार तरीके से आवाज उठाई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता ने पूरे कार्यक्रम की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।

प्रकोष्ठ संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. निलेश कुमार ने शिविर में विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर पावती प्राप्त की। आवेदन में मुख्य रूप से संचालक स्वास्थ्य सेवाएं एवं सीएमएचओ द्वारा जारी आदेशों के पालन की मांग की गई थी, जिसमें बीएमओ सूरजपुर के नाम से पत्र जारी होने के बावजूद कर्मचारियों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के ये कर्मचारी कब तक शोषण सहते रहेंगे?

जिन कर्मचारियों के कंधों पर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था टिकी हुई है, वही कर्मचारी आज एक मजदूर की दैनिक मजदूरी से भी कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं।

संघ का कहना है कि उनकी केवल एक ही मांग है — कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान, लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार इस मांग को दबाने में लगे हुए हैं।

शिविर में मौजूद कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण आवेदन पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई और केवल औपचारिकताएं निभाई गईं। कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि यदि सुशासन तिहार जैसे मंच पर भी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो आखिर कर्मचारी न्याय की उम्मीद किससे करें?

 

anil sahu
Author: anil sahu

जिला प्रतिनिधि सूरजपुर