एसईसीएल विश्रामपुर में ठेकेदार ने निविदा में लगाई फर्जी टीडीआर पेपर

अनिल साहू

सूरजपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर के सिविल विभाग द्वारा पिछले दिनों निकाले गए निविदा में एक ठेकेदार द्वारा दो लाख तीस हजार रुपए की फर्जी टीडीआर पेपर जमा करने का मामला जांच में सामने आने के बाद पखवाड़े भर से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी दोषी ठेकेदार के खिलाफ न एसईसीएल प्रबंधन और न ही स्टेट बैंक प्रबंधन ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। प्रबंधन और बैंक दोनों मामले को दबाने में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि अगर पुलिस तक मामला पहुंचा तो बैंक और प्रबंधन दोनों के लिए मुसीबत आ जाएगी, इसलिए भी पुलिस से बचने दोनों मामले में कोई कार्यवाई नहीं चाहते हैं। दोनों एक दूसरे का मामला बताकर मामले से खुद को किनारे करने टाल मटोल कर रहे हैं। प्रबंधन की ओर से मामले में एफआईआर न कराकर ठेकेदार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन आज पखवाड़े भर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठेकेदार ने प्रबंधन के पास अब तक कोई जवाब नहीं प्रस्तुत किया है।स्टॉफ ऑफिसर सिविल थंगराज ने बताया कि ठेकेदार जवाब नहीं प्रस्तुत कर रहा है और हमने ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने का प्रपोजल तैयार कर पुट अप कर दिया है। उन्होंने एफआईआर कराने के सवाल पर कहा कि यह काम बैंक प्रबंधन को करना चाहिए क्योंकि उनके पेपर व सील मुहर का दुरुपयोग कर फर्जी टीडीआर बनाया गया है। टेंडर अनुबंध में जो नियम शर्त है हम उस आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं।
*ये था मामला:-* ज्ञात हो कि पिछले दिनों एसईसीएल बिश्रामपुर के सिविल विभाग द्वारा डे टुडे मेंटनेंस ऑफ सीआईएसफ कैम्प एंड मेन मैगजीन के कार्य का टेंडर बुलाया था, जिसमें ठेकेदार आदित्य कंस्ट्रक्शन को एलवन के आधार पर काम मिला था। जिसके एवज में ठेकेदार को कम्पनी के पास दो लाख तीस हजार की अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करनी थी। संबंधित ठेकेदार द्वारा उक्त राशि 2 लाख 30 हजार रुपए का एसबीआई बिश्रामपुर शाखा के सील मुहर लगी प्रिंटेड टर्म डिपाजिट की हुबहु रसीद विभाग में जमा करा दी। जब टीडीआर वित्त विभाग पहुंचा तो रसीद में शंका होने पर वित्त विभाग ने एसबीआई बिश्रामपुर को पत्र लिखकर इसके सत्यापन की मांग कर दी। बताया जा रहा है कि सत्यापन के दौरान उक्त टीडीआर का बैंक में कहीं उल्लेख नहीं होने और एकदम असली जैसा प्रतीत होने पर बैंक के अधिकारी भी चकित रह गए और इसके फर्जी होने का जवाबी पत्र एसईसीएल के वित्त विभाग को भेज दिया। इधर वित्त विभाग ने उस टीडीआर और बैंक के पत्र को सिविल विभाग को लौटा दिया, जबकि इस धोखाधड़ी मामले को वित्त विभाग संज्ञान में लेकर इसकी जांच शुरू कर सकता था लेकिन वित्त विभाग ने जांच कराना किस कारण से उचित नहीं समझा यह समझ से परे है। सूत्रों की मानें तो पहले भी कई ठेकेदारों ने इस प्रकार फर्जी टीडीआर की रसीद सिविल सहित अन्य विभागों के विभिन्न निविदाओं में जमा कराई है। इसके अतिरिक्त बैंक प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के दायरे में है कि आखिर बैंक की हूबहू रसीद व सील मुहर ठेकेदार को किसने उपलब्ध कराई, क्या कोई बैंक का कर्मी तो इस कार्य में लिप्त नहीं है, इन सब बातों का खुलासा पुलिस जांच में ही होने के कयास लगाए जा रहे हैं। बैंक प्रबंधन को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी मामले की जांच पुलिस या उच्चस्तर से करानी चाहिए ताकि ग्राहकों का विश्वास बैंक पर बना रहे।

anil sahu
Author: anil sahu

जिला प्रतिनिधि सूरजपुर

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