

भरत लाल गुप्ता
अलकापुरी में झटका तार की चपेट में आया नन्हा हाथी, वन विभाग की जांच शुरू; ग्रामीणों में आक्रोश और शोक
उदयपुर। करमकठरा जंगल से लगे अलकापुरी क्षेत्र में बुधवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए विद्युत झटका तार की चपेट में आने से एक हाथी शावक की मौत हो गई। घटना के बाद वन्यजीव सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार इन दिनों करमकठरा सहित आसपास के जंगलों में हाथियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है। हाथियों के दल जंगल से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। इसी दौरान हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र में खेत के चारों ओर लगाए गए झटका तार के संपर्क में हाथी शावक आ गया। विद्युत प्रवाह की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत होने की बात सामने आई है।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा वन अमला
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। वन अमले द्वारा मृत हाथी शावक के शव का आवश्यक परीक्षण एवं नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। खेत में लगाए गए तार, उसमें विद्युत प्रवाह और घटना की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। विभागीय जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटनास्थल पर दिनभर जुटी रही ग्रामीणों की भीड़
हाथी शावक की मौत की खबर फैलते ही गुरुवार को घटनास्थल के आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। नन्हे हाथी की मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल रहा। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि हाथियों की आवाजाही वाले जंगल से लगे इलाकों में खेतों के आसपास विद्युत झटका तार में करंट प्रवाहित करना वन्यजीवों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।

ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की लापरवाही या अवैध रूप से विद्युत प्रवाह करने की बात सामने आती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने जंगल से लगे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों को चिन्हित करने और किसानों को वन्यजीवों से खेतों की सुरक्षित सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक करने की मांग की है।
हाथी-मानव संघर्ष के बीच एक और गंभीर घटना
हाथी शावक की मौत ने एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग और प्रशासन को ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।






