परशुरामपुर के पटेल स्व सुकुल राम की 33वां पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई

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गुड़ी ग्राम-परशुरामपुर में सरपंच सरूता जी के नेतृत्व में गांव के प्रथम पुरखा शक्ति को दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया l

 

सूरजपुर जिले के  ग्राम पंचायत  परशुराम पुर -स्व.सुकुल राम पटेल जी का 33 वां पुण्य तिथि पर (पटेल चौक) में शोक सभा का आयोजन कर,उनके द्वारा किए गए महान् कार्यों को याद कर “दीप प्रज्ज्वलित सह-पुष्पांजली” अर्पित किया गया।

इस सभा पर उनके स्नेहील परिवार उपस्थित होकर “स्व.सुकूल राम पटेल” जी को याद किया

। उनके सुपुत्र एवं उतराधिकारी तिरूमाल- बलीराम पटेल जी द्वारा अपने दुःखद संवेदना को व्यक्त करते हुए, अपने “पेन पुरखा शक्ति बुढा देव” स्वरूप स्व.सुकुल राम पटेल जी द्वारा किए गए पुनीत कार्य को याद कर उपस्थित सभा को संबोधित करते हुए,

इस आयोजन के लिए उपस्थित सगाजनों को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किये और उन्होंने अपने “पेन पुरखा शक्ति” द्वारा दिए गए आशिष वचन को बताया।

और गांव में सभी को एकजुट होकर किसी भी कार्य को करने के लिए सलाह मशवरा की जरूरत है बताया।

ताकि गांव की एकता और सुमित को देखकर आनेवाले नव पीढ़ी अमल करेंगे और आपसी सहयोग और भाईचारा के रास्ते पर चलकर अपना और समाज के विकास के बारे सोचेंगे।

इस अवसर पर उपस्थित तिरूमाल – गोपाल सिंह पुहूप जी द्वारा, अपने शब्दों में बताया कि मैं उनके साथ कुछ पल अपना बिताया हूं।

जब भी समय मुझे समय मिलता था मैं जाता था। उनके कार्यकाल में गांव में सभी लोग बिना सलाह मशवरा लिए, कोई भी कार्य नहीं करते थे।

सभी समुदायों को एक नजर में देखते थे। उनके लिए कोई अपना और पराया नहीं होते थे।

सही और ग़लत का निष्पक्ष न्याय करते थे। उनके कार्यकाल में गांव में सुशासन और सुव्यवस्थित था।

 

न्याय व्यवस्था उनके हाथ में था। ऐसा “समाजिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था” रहा है!

हमें भी उनके पद् चिन्हों पर चलना चाहिए।

सरपंच तिरूमाल – लालकेश्वर सिंह सरूता जी ने भी अपने व्यक्तव्य में कहा कि मैं आदरणीय हमारे “पेन पुरखा शक्ति” स्व.सुकुलराम पटेल जी को नहीं देखा था।

लेकिन मैं उनके बारे में सगाजनों से सुना था। क्योंकि मैं भी एक गांव की मुखिया होने के नाते मेरा यह कर्तव्य बनता है।

कि मैं उनके द्वारा बताए गए पद् चिन्हों पर चलूं और गांव के सभी समुदायों को एक साथ एक आपसी विचार धारा के साथ गांव के विकास के लिए कार्य करूं ऐसा मेरा सोंच है।

इसलिए मैं आज अपने गुड़ी ग्राम -को बसाने वाले “पेन पुरखा शक्ति को प्रतिक स्वरूप” एक स्थान दिया हूं।

ताकि “स्व. पटेल जी” का आशीर्वाद सैदव गांव को मिलता रहे। और उनके छत्रछाया में मुझे अपने गांव के विकास के लिए एक उचित मार्ग और रास्ता मिल सके।

और उनके जैसे गांव की समाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक रीति-रिवाजों सह- धार्मिक और न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए,

सभी के भावनाओं का सम्मान कर सकूं ऐसा दृढ़ इच्छाशक्ति और आर्शीवाद स्वरूप प्रदान प्राप्त हो। 

साथ ही तिरूमाल – कमलेश प्रकाश सिंह मरावी जी ने अपने उद्बोधन में सर्व प्रथम गुड़ी ग्राम के पेन पुरखा शक्तियों को नमन् करते हुए कहा कि आज मेरे लिए शौभाग्य और एक दुःखद घड़ी भी है ,

कि मैं अपने गुड़ी ग्राम को बसाने वाले “पेन पुरखा शक्ति” हमारे बीच नहीं हैं। उनके द्वारा किए गए महान् कार्यों को सुना तो हृदय से भावुक हूं।

लेकिन उन्होंने जिस दिन इस “गुड़ी ग्राम की संरचना” की होगी तो “सर्वप्रथम इस प्रकृति पेन शक्ति “फडापेन एवं अपने आराध्य शक्ति बुढा देव एवं बुढ़ी माई” व गुड़ी देवालय की स्थापना कर किया होगा।

जो आज हमको अपने गांव की “पारंपरिक व्यवस्था में भौतिक अवस्था” में दिखाई देता है।

और “अदृश्य शक्तियां के रूप में विद्यमान” नजर आता है। जो सभी को दिखाई नहीं देता है। सिर्फ लोग महसूस कर सकते हैं।

लेकिन हमारे गुड़ी ग्राम में “घटित -घटनाओं” को संज्ञान में लाने के लिए “देव और देवी शक्तियों” के रूप में किसी के शरीर में भाव भर कर आते हैं।

और हमारे व्याप्त समस्याओं का निदान भी करते हैं। ऐसा हमारे गुड़ी ग्राम के “प्रकृति पेन शक्ति एवं पेन पुरूखा शक्तियों” का प्रभाव रहा है। और आज भी विद्यमान है।

लेकिन आज हमें उनको जानने-मानने और सम्मान देने की बात है। हमारे पेन शक्तियां भाव के भूखे होते हैं।

इसलिए सच्चे मन से सच्ची भावनाओं से उन्हें याद करेंगे तो निश्चित ही हमारे सभी समस्याओं का समाधान करते हैं।

गुड़ी ग्राम के प्रमुख प्रशासनिक व्यवस्था(पावर) ( भुमिहार/ ठाकुर पेन/ पटेल, बैगा,अल्वा/ गायता ,सिरहा, गुड़ी कोटवार ) की पांच प्रमुख व्यवस्था ही गुड़ी ग्राम की पारंपरिक व्यवस्था थी।

और अपने गांव की व्यवस्था को संचालित करने के लिए जो सभा होती थी।इसी सभा को पारंपरिक ग्राम सभा कहा जाता है।

जो पेड़ नीचे या गुड़ी घर में संचालित होता है।इसलिए हमें अपने पुरखों द्वारा संचालित और स्थापित ( गुड़ी देवालय व्यवस्था, नार व्यवस्था,गण व्यवस्था, आर्थिक प्रबंधन की व्यवस्था व गुड़ी- उद्यान व्यवस्था के साथ-साथ समुदाय और समाज की समाजिक व्यवस्था, न्यायिक व्यवस्था, पारंपरिक रीति-रिवाज व सांस्कृतिक तीज -त्यौहारों और धार्मिक व्यवस्थाओं को संरक्षित करना होगा।

सभी समुदायों के सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना होगा।

तभी परिवार और समुदाय खुशहाल होगा।तब सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित होगा।

श्रद्धांजलि सभा के कार्यक्रम में तिरूमाल -लालकेश्वर सिंह सरूता  (सरपंच), तिरूमाल -परमेशवर सिंह ओरकेरा  , तिरूमाल – गोपाल सिंह ओरकेरा , तिरूमाल – कमलेश प्रकाश सिंह मरावी , तिरूमाल -मनबोध सिंह ओरकेरा,, आशिक खान पत्रकार सहित काफी संख्या मे लोग मौजूद थे l

Aashiq khan
Author: Aashiq khan