

भरत लाल गुप्ता
ग्रामीण युवा जन कल्याण समिति की अनूठी पहल: तिलहन फसलों और वन उत्पादों के संरक्षण के साथ शुद्ध तेल उत्पादन को बढ़ावा
उदयपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने की दिशा में ग्रामीण युवा जन कल्याण समिति उदयपुर द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। संस्था वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं, किसान समूहों और ग्रामीण समुदायों को पारंपरिक तिलहन फसलों एवं वन उत्पादों से तेल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए ग्रामीण आजीविका को मजबूती देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
पारंपरिक तिलहन फसलों को फिर से बढ़ावा देने की तैयारी
समिति द्वारा ग्रामीण महिलाओं एवं किसानों को पारंपरिक तिलहन फसलों के संरक्षण, उत्पादन एवं उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सरसों, तिल, रामतिल, अलसी, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों के स्थानीय बीजों के संरक्षण तथा अधिक क्षेत्र में खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। संस्था का मानना है कि पारंपरिक बीज न केवल कृषि जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वन उत्पादों से स्थानीय स्तर पर तेल उत्पादन का प्रयास
वनांचल क्षेत्रों में उपलब्ध महुआ डोरी, करंज, रामअरण्डी एवं ओइंजन जैसे वन तिलहन उत्पादों के संरक्षण और व्यवस्थित संग्रहण पर भी समिति द्वारा विशेष जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों को इन वन उत्पादों को कम कीमत पर बाहरी बाजारों में बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर उचित मूल्य दिलाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण महिलाओं के माध्यम से इन उत्पादों की खरीदी, प्रसंस्करण और तेल उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे ग्रामीणों को उनके वन उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे।

बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की पहल
संस्था का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तिलहन एवं वन उत्पादों का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण किया जाए। इससे ग्रामीण उत्पादों का मूल्यवर्धन होगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों को आधुनिक प्रसंस्करण एवं विपणन से जोड़कर गांवों में छोटे ग्रामीण उद्यम विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक तैयार होगी कार्ययोजना
समिति सचिव कन्हाई बंजारा ने बताया कि संस्था आने वाले समय में स्थानीय महिलाओं, किसान समूहों और युवाओं को संगठित कर पारंपरिक तेल उत्पादन को एक व्यवस्थित ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत बीज संरक्षण, संग्रहण, तेल निष्कर्षण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन जैसे विषयों पर चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण और कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता से जोड़कर आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
शुद्ध एवं प्राकृतिक तेल के प्रति जागरूकता
इस पहल के माध्यम से लोगों को स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले प्राकृतिक एवं पारंपरिक तेलों के उपयोग के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। समिति का प्रयास है कि पारंपरिक तिलहन फसलों और वन उत्पादों के संरक्षण को व्यापक रूप दिया जाए तथा अधिक से अधिक किसानों, महिलाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान से जोड़ा जाए।
ग्रामीण युवा जन कल्याण समिति की यह पहल यदि व्यापक स्तर पर आकार लेती है, तो इससे एक ओर जहां पारंपरिक तिलहन फसलों और वन संसाधनों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के हाथों में रोजगार और किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की नई राह खुल सकती है।





