
जैसा कि आप जानते हैं की जन स्वास्थ्य रक्षक की योजना ऐसे जनप्रतिनिधि जिसे हम सांसद कहते हैं के माध्यम से पूरे भारत के 80% गांव में निवासरत नागरिकों के लिए कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर जन स्वास्थ्य रक्षक के रूप में संसद में पारित योजना को पूरे देश में क्रियान्वित करते हुए संबंधित राज्यों में भी क्रियान्वित किया गयाl
निश्चित रूप से ऐसा संसद काफी संवेदनशील रहा होगा जिसने पूरे देश के बारे में इस योजना को क्रियान्वित करायाl
कालखंड परिस्थिति बदलने के बाद ऐसी कौन सी आफत केंद्र व राज्य शासन के बीच आ गई कि महज ₹50 मानदेय राशि के रूप में कार्यरत जन स्वास्थ्य रक्षक की योजना को या तो नजरअंदाज किया गया या बंद किया गया ?क्या यही दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र का तकाजा है
यह तो देशवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है ! जैसे बच्चे लोग बालू के घर बनाते हैं और तुरंत छोड़ देते हैं! भारत सरकार द्वारा वैसा ही जन स्वास्थ्य रक्षकों के लिए किया गया है!
निश्चित रूप से यह मानवीय आधार पर काफी दुखद एवं आलोचना का विषय है !जिस संसद से पूरे देश की जीवन शैली प्रभावित एवं क्रियान्वित होती है,
उसी संसद से बनाए कानून का आज यह हाल जिसका परिणाम आज पूरे भारत के कार्यरत जन स्वास्थ्य रक्षक भुगत रहे है!
पूरी जीवन अपने सामान्य मांग को लेकर आस लगाए बैठे रहे! परंतु यह सत्ता धीश लोग जिनको सिर्फ अपने से मतलब है! देशवासियों से सिर्फ वोट के समय इनका मतलब रहता है!
इसके बाद भूल जाते हैं !ऐसी विडंबना हमारे जन स्वास्थ रक्षक एवं हमारे ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत ऐसे ग्रामीण भाई-बहन के समक्ष हैं!
जिनको किस उद्देश्य se स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की कड़ी में यह योजना क्रियान्वित किया गया था
इन राजनीतिक दलों के निष्क्रिय घटिया सोच से वंचित है विडंबना इनके द्वारा बनाए कानून से आज रात्रि को किसी को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाती है
लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत जन स्वास्थ रक्षक बिना पैसे की प्रवाह करें उस व्यक्ति की सेवा में लग जाता है! ऐसे स्वास्थ प्रहरी को मूलभूत स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में जन स्वास्थ्य रक्षक की भूमिका को रेखांकित करते हुए उसे शासकीय दर्जा नहीं देना यह काफी अलोकतांत्रिक है !
इस कड़ी में हम जन स्वास्थ रक्षक भी उतने ही दोषी हैं! कि हम लोग संगठन के महत्व को नहीं समझते और ना ही शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी बातों को निरंतर रूप से रख पाते हैं!
वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भी छोटी-छोटी मांगों को लेकर के लोग संगठित हो गए बलपूर्वक दबाव देकर चुनौती के साथ अपना मांग पूरी करवा रहे हैं शिवाय जन स्वास्थ्य रक्षकों को छोड़कर लेकिन जन स्वास्थ रक्षक जो जनता की स्वास्थ्य के साथ सीधे सरोकार है
देश मैं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हम सभी सीएचबी असंगठित हैं !तो हमारी मांग कोई भी सरकार कैसे सुनेगी पूर्ण करेगी
वह बात अलग है कि योजना बंद हो गई है परंतु लोगों का स्वास्थ्य एवं बीमारी तो बंद नहीं हुई है सेवाएं तो चल रही है अनुभव तो किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी से कम नहीं है ? फिर ऐसी स्थिति में क्या ऐसी दिक्कत है कि ,सरकार जन स्वास्थ्य रक्षकों की ही बात को नहीं सुनती !
यह काफी चुनौती भरा प्रश्न है और इसकी समाधान के लिए हम सब को पुनः संगठित होकर जागरूक होते हुए अपनी मांग को चुनावी सरगर्मियां के पूर्व हमें रखना हम सब के हित में होगा
और इस हेतु हम सब कृत संकल्पित होकर सभी जन संरक्षण सामने आएसहयोग प्रदान करें क्योंकि ऐसा नहीं करने से आपके जीवन में क्या कुछ चल रहा है यह हम आप अच्छी तरह जान रहे हैं
इसलिए समस्त 32 जिलों के जन स्वास्थ रक्षक जिला अध्यक्षों से निवेदन है कि आप लोग अपना पद नाम मोबाइल नंबर ग्रुप में शेयर करें ताकि एक शिष्टमंडल तैयार किया जाए जिसमें समस्त जिले के अध्यक्ष की पूरी बायोडाटा रहेगी एवं प्रदेश पदाधिकारी रहेंगे और हम एक शिष्टमंडल के रूप में कौन सा मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर अंतिम बार सामूहिक प्रयास करेंगे
अपनी मांग को लेकर और निश्चित रूप से इसमें हम सफल होंगे क्योंकि यह ऐसा वक्त है जिस पर अधिकांश मांगे सरकार ने पूर्ण कर रही है क्योंकि आने वाले समय में जनता के बीच ही इन्हें आना है क्योंकि जिस कुर्सी में यह बैठे हैं वह कुर्सी इन की खरीदी हुई कुछ नहीं है यह हमारे आपके ताकत से नहीं मिली है
इसलिए हमें अपनी ताकत का एहसास इनको कराना है और प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के लिए एक क्रांतिकारी पहल करना है l
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