
अनिल साहू
रामानुजनगर में सैकड़ो स्वयंसेवकों ने निकाला भव्य पथ संचलन, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
सूरजपुर/ रामानुजनगर – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रविवार को रामानुजनगर में संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य पथ संचलन में सैकड़ो स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कदमताल करते हुए हिस्सा लिया। घोष की मधुर धुन पर स्वयंसेवकों का अनुशासित संचलन देखकर नगरवासी अभिभूत हो उठे। पूरे नगर में देशभक्ति और संगठन की भावना का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
पथ संचलन रामानुजनगर मंडल द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें खंड संघचालक बृजेश राजवाड़े, मुख्य अतिथि लालनराम राजवाड़े तथा मुख्य वक्ता संजय भारत उपस्थित रहे। संचलन लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तक निकाला गया, जिसके मार्ग में नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। एकल विद्यालय, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों ने भी संचलन में बढ़-चढ़कर सहभागिता की। जगह-जगह आतिशबाजी और देशभक्ति के नारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम के दौरान विजयादशमी उत्सव एवं शस्त्र पूजन भी संपन्न हुआ। मंच पर वक्ताओं ने संघ के शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक महत्व और संगठन की यात्रा पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता संजय भारत ने अपने उद्बोधन में कहा कि—
“संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि राष्ट्र का पुनर्निर्माण करना है। जब भारत पर बाहरी आक्रमण हुए, मूर्तियों का खंडन किया गया और समाज विखंडित हुआ, तब डॉ. हेडगेवार ने यह अनुभव किया कि यदि हिंदू समाज संगठित नहीं हुआ तो राष्ट्र की आत्मा कमजोर पड़ जाएगी। इसीलिए 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई।” उन्होंने आगे कहा कि संघ आज शिक्षा, सेवा, समाज निर्माण और संस्कार के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। देश के हर कोने में संघ के स्वयंसेवक निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटे हैं। संघ के पंच परिवर्तन सामाजिक समरस्ता, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी, कुटुम्ब प्रबोधन को विस्तार से बताया, शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नव संकल्प का अवसर है। उन्होंने युवाओं से संघ के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

नगरवासियों का उत्साह और जनसहभागिता
पथ संचलन का स्वागत नगर के मुख्य मार्गों पर हुआ। व्यापारियों ने दुकानों पर सजावट की, ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में जयकारे लगाकर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। बच्चों और युवाओं में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में अल्पाहार के साथ पथ संचलन का समापन हुआ। अनुशासन, संगठन और समर्पण का यह दृश्य रामानुजनगर के इतिहास में अविस्मरणीय बन गया।
Author: anil sahu
जिला प्रतिनिधि सूरजपुर






