

अनिल साहू
परीक्षा से वंचित किए जाने की शिकायत पर हुई जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही, अब जिले के अन्य संस्थानों की भी होगी पड़ताल
सूरजपुर । विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी संदेश के साथ सूरजपुर जिला प्रशासन ने बिना पंजीयन संचालित हो रहे गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए संस्थान को सील कर दिया है। ग्राम तिलसिवां स्थित इस संस्थान में डी.एम.एल.टी. एवं बी.एम.एल.टी. पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा से वंचित किए जाने और उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की शिकायत सामने आई थी।
शिकायत के बाद जांच, पंजीयन नहीं होने का खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों के परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने और उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने संबंधी शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंची थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के निर्देशन में जांच कराई गई।
जांच के दौरान पाया गया कि गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट का छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल, रायपुर में पंजीयन नहीं था। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई की।
अधिकारियों की मौजूदगी में संस्थान सील
संस्थान को सील करने की कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, तहसीलदार सूर्यकांत साय, नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश श्रेष्ठ तथा उनकी टीम की उपस्थिति में की गई।
इस कार्रवाई के बाद जिले में संचालित अन्य पैरामेडिकल एवं संबंधित शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है।
दूसरे संस्थानों की भी होगी जांच
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिले में संचालित अन्य संबंधित संस्थानों की भी जांच की जाएगी। इस दौरान संस्थानों के पंजीयन, मान्यता और निर्धारित मापदंडों के पालन की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच के दायरे में आएंगे दूसरे संस्थान
गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट पर हुई कार्रवाई ने जिले में संचालित ऐसे संस्थानों की वैधानिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि आगामी जांच में कितने संस्थान निर्धारित नियमों और मानकों पर खरे उतरते हैं। वहीं, परीक्षा से वंचित होने की शिकायत करने वाले विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।




