

- नीलगिरी की आड़ में ‘हरे सोने’ की तस्करी, लटोरी में प्रशासन का बड़ा धावा
- सूरजपुर में लकड़ी माफिया पर गरजा प्रशासन, अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड
- नीलगिरी के बीच छिपा था करोड़ों का खेल, तहसील प्रशासन की रेड से मचा हड़कंप
- UP से सूरजपुर तक फैला लकड़ी तस्करी का जाल, लटोरी में बड़ी कार्रवाई
- हरे पेड़ों की लूट पर चला बुलडोजर एक्शन, लकड़ी माफियाओं में भगदड़
- सूरजपुर में ‘हरे सोने’ की डकैती! बिना NOC चल रहा था अवैध लकड़ी साम्राज्य
- मौत, माफिया और महाठगी: लटोरी में अवैध लकड़ी कारोबार का काला सच उजागर
- लकड़ी माफियाओं की ‘सेटिंग’ का खेल बेनकाब, प्रशासन की रेड से खुलीं परतें
लटोरी में वन संपदा की लूट, तहसीलदार की कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप
सूरजपुर / लटोरी। जिले के लटोरी तहसील क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय अंतरराज्यीय लकड़ी माफिया के काले साम्राज्य पर आखिरकार तहसील प्रशासन का डंडा चल गया है।
नीलगिरी के पेड़ों की आड़ में चल रहे हरे-भरे, लहलहाते और कीमती पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खेल का पर्दाफाश करते हुए लटोरी तहसीलदार की टीम ने मौके पर पहुंचकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से जुड़े लकड़ी तस्करों में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह शातिर अंतरराज्यीय सिंडिकेट नीलगिरी की आड़ में वन संपदा को बेरहमी से उजाड़ रहा था।
बड़े-बड़े ट्रकों में नीलगिरी के लट्ठों के बीचो-बीच कीमती और प्रतिबंधित लकड़ियों को छुपाकर दूसरे राज्यों में धड़ल्ले से परिवहन किया जा रहा था। जब इस अवैध कारोबार की पुख्ता सूचना लटोरी तहसील कार्यालय को मिली, तो तहसीलदार ने बिना वक्त गंवाए तत्काल एक विशेष टीम को मौके पर रवाना कर इस अवैध नेटवर्क पर शिकंजा कसा।

अवैध भंडारण का गढ़ बना इलाका, न पंचायत की NOC न कोई कागज
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन बाहरी तस्करों ने क्षेत्र में लकड़ियों का विशाल अवैध भंडारण (डंपयार्ड) बना रखा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस भंडारण के लिए न तो संबंधित भू-स्वामियों या तस्करों के पास कोई वैध दस्तावेज हैं और न ही स्थानीय ग्राम पंचायत से किसी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया है। बिना किसी कानूनी अनुमति के पूरा का पूरा सिंडिकेट क्षेत्र की हरियाली को निगलने में लगा हुआ था।

खुला खेल ऊपर तक सेटिंग है, डरने की बात नहीं
> सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश से आए इन बेखौफ लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम दावा करते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है, संबंधित अधिकारियों से मजबूत सेटिंग है।
यही वजह है कि सूरजपुर, लटोरी, करंजी, ओड़गी, भैयाथान और बिहारपुर जैसे सुदूर क्षेत्रों में इन तस्करों ने स्थाई डेरा जमा रखा है। वन विभाग और राजस्व विभाग के कुछ जमीनी कर्मचारियों की कथित सांठगांठ और रहस्यमयी खामोशी अब सीधे सवालों के घेरे में है।
खून से सने हैं तस्करी के हाथ जा चुकी हैं कई जानें
यह सिर्फ पर्यावरण की तबाही का मामला नहीं है, बल्कि इस अवैध कारोबार ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है।
शिक्षिका की मौत
कुछ समय पूर्व रामानुजनगर क्षेत्र में अवैध लकड़ी परिवहन में लगे एक ट्रैक्टर की लापरवाही के कारण एक शिक्षिका को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
मजदूर की मौत
वृक्षों की अवैध और असुरक्षित ओवरलोडिंग के दौरान एक गरीब मजदूर की दबकर मौत हो गई थी।
इन गंभीर हादसों के बाद भी जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और धृतराष्ट्र बनी आंखें क्षेत्र में बड़े जनाक्रोश को जन्म दे रही हैं।
आंदोलन की चेतावनी माफियाओं पर दर्ज हो FIR, वरना उग्र प्रदर्शन
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की इस ताजा कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही दो टूक चेतावनी भी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी राज्यों से आए इन तस्करों पर तत्काल

कठोर आपराधिक मामले (FIR) दर्ज किए जाएं।
अगर प्रशासन ने केवल जब्ती की खानापूर्ति कर मामला शांत कर दिया, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
कब तक मौन रहेगा वन अमला
आखिर नाक के नीचे महीनों से चल रहे इस बड़े सिंडिकेट की भनक स्थानीय वन विभाग के अमले को क्यों नहीं लगती
जब दूसरे राज्य के माफिया बेखौफ होकर वन संपदा उजाड़ रहे हैं, तो संबंधित बीट गार्ड और अधिकारी क्यों खामोश बैठे हैं
हादसों और मौतों के बाद भी क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था । अब देखना यह है कि तहसील प्रशासन की इस शुरुआती कार्रवाई के बाद क्या पुलिस और वन विभाग मिलकर इन अंतरराज्यीय सरगनाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजते हैं, या फिर यह हरा सोना यूं ही चंद रुपयों की सांठगांठ की भेंट चढ़ता रहेगा
Author: anil sahu
जिला प्रतिनिधि सूरजपुर





