सरईपारा में करमा नृत्य की धूम के साथ गणेश विसर्जन, हर्षोल्लास से भरा ऐतिहासिक आयोजन

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अनिल साहू

सूरजपुर । जिले के रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत सरईपारा में गणेश विसर्जन का पर्व परंपरागत करमा नृत्य की मधुर स्वरलहरियों और हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक रहा, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और सामुदायिक एकता का भी शानदार प्रदर्शन रहा।

दरअसल गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर स्थापित गणपति बप्पा की प्रतिमा को विदाई देने के लिए ग्रामवासियों ने मिलकर एक भव्य जुलूस निकाला। इस जुलूस में परंपरागत करमा नृत्य की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते कदम और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे नर्तक-नर्तकियों ने गणपति बप्पा को विदाई देने के इस पल को अविस्मरणीय बना दिया। वहीं दूसरी तरफ सरपंच विजय कुमार सिंह ने कहा, “गणेश विसर्जन का यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने का एक शानदार अवसर है। करमा नृत्य के साथ गणपति की विदाई ने पूरे गांव को एक सूत्र में बांध दिया।” शिक्षक नंद कुमार सिंह ने भी इस आयोजन को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। कुलमिलाकर यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने ग्रामवासियों को एकजुट होकर अपनी परंपराओं को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया। गणपति बप्पा की विदाई के साथ ग्रामवासियों ने अगले वर्ष उनके शीघ्र आगमन की कामना की।

*ग्रामवासियों की एकजुटता और उत्साह* 

कार्यक्रम में सरपंच विजय कुमार सिंह और शिक्षक नंद कुमार सिंह के नेतृत्व में ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। जनपद पंचायत रामानुजनगर के सहयोग से आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में ग्रामवासियों ने गणेश पूजा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और सामूहिक एकता का परिचय दिया। गणपति की प्रतिमा को नदी तट तक ले जाकर पूरे विधि-विधान और भक्ति-भाव के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारे गूंजते रहे।

*करमा नृत्य ने बांधा समां*  

करमा नृत्य, जो समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है, इस आयोजन की जान रहा। इस नृत्य में पुरुष और महिला दोनों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। महिलाओं ने रंगीन साड़ियों में करमा गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि पुरुषों ने ढोल और मांदर की थाप पर संगत दी। यह नृत्य न केवल भक्ति का प्रतीक था, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और फसल की समृद्धि के लिए प्रार्थना का भी माध्यम बना।

anil sahu
Author: anil sahu

जिला प्रतिनिधि सूरजपुर

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