ABVP की रैली में छात्रों को उतारने पर बवाल: NSUI ने कलेक्टर को सौंपा 3 पन्नों का ज्ञापन

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अनिल साहू

नाबालिग विद्यार्थियों की सुरक्षा और अभिभावकीय सहमति पर उठे सवाल, 9 बिंदुओं पर जांच की मांग; 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

सूरजपुर ।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से 5 अक्टूबर को सूरजपुर में आयोजित कार्यक्रम एवं रैली में स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को शामिल किए जाने के आरोप को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मामले में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

NSUI जिलाध्यक्ष आकाश साहू के नेतृत्व में संगठन ने जिला कलेक्टर के नाम तीन पृष्ठों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, जिनमें नाबालिग विद्यार्थी भी शामिल बताए गए हैं, को ABVP की रैली में शामिल किया गया। NSUI ने विद्यार्थियों को तेज धूप में शहर की सड़कों पर रैली में शामिल कराए जाने को लेकर उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और अभिभावकीय सहमति पर सवाल उठाए हैं।

किसके निर्देश पर रैली में पहुंचे विद्यार्थी?

NSUI ने प्रशासन से सबसे पहले यह जांच कराने की मांग की है कि विद्यार्थियों को रैली में शामिल होने के लिए किस स्तर से निर्देश दिए गए थे। संगठन ने संबंधित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों से जानकारी लेने तथा विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजे जाने के संबंध में प्राप्त निर्देश और अनुमति की जांच की मांग की है।

साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि नाबालिग विद्यार्थियों के अभिभावकों से कार्यक्रम में शामिल होने की पूर्व सहमति ली गई थी या नहीं। यदि सहमति नहीं ली गई थी तो इसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

राजनीतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों के इस्तेमाल का आरोप

ज्ञापन में NSUI ने सवाल उठाया है कि कहीं विद्यार्थियों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक अथवा संगठनात्मक कार्यक्रम में भीड़, प्रचार या शक्ति प्रदर्शन के लिए तो नहीं किया गया। संगठन ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि विद्यार्थियों को शामिल कराने के लिए किसी प्रकार के दबाव, प्रभाव या गलत जानकारी का इस्तेमाल सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

सुरक्षा, पानी और चिकित्सा व्यवस्था की भी जांच की मांग

NSUI ने रैली के दौरान विद्यार्थियों के लिए पेयजल, छाया, विश्राम, चिकित्सा एवं सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कम उम्र के विद्यार्थियों को लंबे समय तक सड़क पर रैली में शामिल कराया गया तो उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी थी, यह भी जांच का विषय है।

ज्ञापन में विद्यार्थियों के अधिकार एवं सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की गई है। NSUI ने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा, सुरक्षा और गरिमा किसी भी राजनीतिक या संगठनात्मक गतिविधि से ऊपर है।

9 बिंदुओं पर जांच, DEO के निलंबन की मांग

NSUI ने प्रशासन के समक्ष कुल 9 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें रैली में शामिल विद्यालयों एवं विद्यार्थियों की संख्या की जांच, संबंधित प्राचार्यों से पूछताछ, अभिभावकीय सहमति की जांच, विद्यार्थियों की भूमिका, सुरक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था की जांच तथा किसी प्रकार के दबाव की पुष्टि होने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग शामिल है।

संगठन ने विशेष रूप से जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर की भूमिका एवं जिम्मेदारी की जांच करते हुए दोष सिद्ध होने की स्थिति में निलंबन की कार्रवाई की मांग की है।

7 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

NSUI जिलाध्यक्ष आकाश साहू ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो NSUI जिला सूरजपुर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

ज्ञापन की प्रतिलिपि कुलपति संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, पुलिस अधीक्षक सूरजपुर, जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सूरजपुर तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी भेजी गई है।

इस दौरान NSUI प्रदेश सचिव राजेश साहू, मुस्तफा खान, रूद्र प्रताप सिंह, शिवम साहू, यश साहू, दुर्गेश जायसवाल सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

anil sahu
Author: anil sahu