अवैध ईट भट्टो मे चोरी का कोयला खपाया जा रहा —, खनिज विभाग मौन

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अंबिकापुर ब्यूरो

 

सूरजपुर जिले के रामानुजनगर अपराध का गढ़ बना, अवैध कारोबार के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन,

क्षेत्र में अपराध और अवैध कारोबार का जाल लगातार फैलता जा रहा है। सट्टा, जुआ, नशीली दवाएं, नशीले सिरप व गोलियां, कबाड़ तथा कोयला तस्करी जैसे गैरकानूनी धंधों ने रामानुजनगर सहित आसपास के कई गांवों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध कारोबारियों के सामने पुलिस और प्रशासन बेबस नजर आ रहा है, जिससे आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है।

सूत्रों के अनुसार रामानुजनगर से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम नकना और तिवरागुड़ी में कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है।

आरोप है कि एक-एक व्यक्ति पांच से दस लाख ईंटें तैयार कर आसपास की ग्राम पंचायतों में शासकीय कार्यों में सप्लाई कर रहा है,

जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में आंख मूंदे हुए हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मोटी कमीशन लेकर ईंट भट्ठा संचालकों को खुली छूट दी जा रही है

, जिसके कारण तस्करों का वर्चस्व लगातार बढ़ता जा रहा है।

नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं प्रजापति समाज के लोगों को 50 हजार ईंट बनाने की सीमित छूट है,

लेकिन इन नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्पादन किया जा रहा है।

हालात ऐसे हैं कि कोयला चोर दिनदहाड़े मोटरसाइकिल पर कुंटलों कोयला ले जाते देखे जा सकते हैं।

आमगांव ओपन कास्ट परियोजना से प्रतिदिन भारी मात्रा में कोयला चोरी होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

शाम ढलते ही कोयला तस्करी का दौर शुरू हो जाता है और यही कोयला अवैध ईंट भट्ठों में खपाया जा रहा है।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण भी गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है।

खनिज विभाग पर यह भी आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

विरोध करने पर कोयला तस्कर ग्रामीणों को धमकाने से भी पीछे नहीं हटते।

इधर नारायणपुर, शिवपुर, रामानुजनगर, त्रिपुरेश्वरपुर और मांजा जैसे इलाकों में नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है।

नशीली दवाएं और सिरप आसानी से उपलब्ध होने के कारण 12 से 20 वर्ष तक के युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि दूर-दराज के नशेड़ी तक जानते हैं कि नशे का सामान कहां मिलता है,

लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती।

स्थानीय जनता का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।

साथ ही सरकार को भारी राजस्व नुकसान और समाज को गंभीर सामाजिक दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन हालातों के लिए जिम्मेदार कौन है

और रामानुजनगर में अपराध पर आखिर कब अंकुश लगेगा—यह सवाल आज पूरी रामानुजनगर की जनता पूछ रही है।

Aashiq khan
Author: Aashiq khan

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