कुमेली जलप्रपात के रेस्ट हाउस मे हो रही है रात रंगीन,– अधिकारी बेखबर

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सूरजपुर जिले के रामानुज नगर-स्थित कुमेली जलप्रपात — में खुलेआम जुए का अड्डा:

वन विभाग का विश्रामगृह बना अवैध गतिविधियों का केंद्र, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल,,

रामानुज नगर क्षेत्र में इन दिनों अवैध जुए का खेल खुलेआम फल-फूल रहा है।

आरोप है कि थाना क्षेत्र से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्यटन स्थल कुम्हेली में वन विभाग के विश्रामगृह (फॉरेस्ट रेस्ट हाउस) को जुए के बड़े अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यहां प्रतिदिन लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है और यह गतिविधि बीते करीब 15 दिनों से लगातार जारी है।

सूत्रों के अनुसार, इस जुआ फड़ में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बैड़न, मनेन्द्रगढ़, कोतमा, अंबिकापुर, बैकुंठपुर और रामानुज नगर जैसे अन्य जिलों से भी जुआरी पहुंच रहे हैं।

शबाब और कबाब के साथ शाही अंदाज में महफिल सजाकर जुआ खिलाया जा रहा है।

आरोप है कि कुछ लोगों की आय का एकमात्र स्रोत ही यह जुआ बन चुका है और वे बिना किसी अन्य काम के चादर बिछाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि यह सब पुलिस की कथित मौन स्वीकृति से हो रहा है।

अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती दिखाता, तो इतने लंबे समय तक यह अवैध गतिविधि चल ही नहीं सकती थी।

मामले को और भी संवेदनशील बनाता है यह तथ्य कि जिस स्थान पर जुआ संचालित हो रहा है, वह वन विभाग का सरकारी विश्रामगृह है।

नियमानुसार, ऐसे विश्रामगृहों का उपयोग केवल शासकीय अधिकारियों या पर्यटकों के ठहरने के लिए किया जाता है। ऐसे में बिना विभागीय अनुमति के वहां जुआ फड़ का संचालन होना,

अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना वन विभाग के आदेश के विश्रामगृह की चाबी आखिर किसे और कैसे मिली।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले से जुड़े वीडियो और फोटो साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं,

जिनके आधार पर जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है।

अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर वन विभाग का विश्रामगृह यूं ही अवैध जुए और अन्य गतिविधियों का अड्डा बना रहेगा।

Aashiq khan
Author: Aashiq khan

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