गरीबों के हक का राशन कहां गया? दुलदुली में मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

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अनिल साहू

19 अगस्त तक कई परिवार राशन से वंचित, कभी स्टॉक खत्म तो कभी शासन का आदेश नहीं आने का दिया हवाला

सूरजपुर/प्रतापपुर। विकासखंड प्रतापपुर के ग्राम पंचायत दुलदुली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों को अगस्त माह का निर्धारित राशन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्टर सूरजपुर के नाम एसडीएम ललिता भगत को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि 19 अगस्त तक कई परिवारों को अगस्त माह का चावल नहीं मिला। राशन लेने के लिए दुकान पहुंचने पर कभी स्टॉक खत्म होने, तो कभी शासन से आदेश नहीं आने की बात कहकर हितग्राहियों को वापस लौटा दिया जाता है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

हर माह आवंटन होता है तो राशन गया कहां?

ग्रामीणों ने सीधे सवाल उठाया है कि जब पात्र हितग्राहियों की संख्या के आधार पर हर माह राशन का आवंटन किया जाता है, तो फिर गरीबों के हिस्से का निर्धारित चावल आखिर गया कहां? ग्रामीणों ने राशन दुकान के आवंटन और वास्तविक वितरण के बीच अंतर की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि दुकान में प्राप्त राशन की मात्रा, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड और हितग्राहियों के राशन कार्ड का आपस में मिलान कराया जाए। इसके साथ ही दुकान में उपलब्ध राशन का मौके पर भौतिक सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि एक माह में यदि दुकान में सैकड़ों क्विंटल चावल का आवंटन हुआ है, तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। कितना राशन आया, कितना बांटा गया और कितना शेष है—हर बिंदु की जांच जरूरी है।

एसडीएम ने दिया जांच का भरोसा

मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। जांच टीम को मौके पर भेजकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाएगा तथा ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो वसूली के साथ दोषियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

राशन नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

वहीं ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मामले की जल्द जांच कराकर पात्र हितग्राहियों को उनका राशन नहीं दिया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दुलदुली की राशन दुकान में गरीबों के हिस्से का चावल कहां गया? आवंटन और वितरण के आंकड़ों की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि गड़बड़ी कितनी बड़ी है और इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।तगड़ी हेडलाइन के कुछ और विकल्प:

 

anil sahu
Author: anil sahu