
सूरजपुर: रामानुजनगर के ग्राम साल्हि में 30 साल पुराने तालाब को पाटने का मामला, ग्रामीणों में आक्रोश



जिला प्रशासन द्वारा 30 वर्ष पहले बनवाए गए एक महत्वपूर्ण जलस्रोत को ग्राम पंचायत साल्हि के सरपंच-सचिव द्वारा बिना अनुमति पाटकर समतल मैदान बना देने का मामला सामने आया है।
तालाब का महत्व
यह तालाब 30 साल पहले राहत कार्य योजना / काम के बदले अनाज योजना* के तहत बना था।
उद्देश्य था:
– ग्रामीणों को निस्तार की सुविधा
– किसानों को खेती-बाड़ी में सिंचाई
– पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए पेयजल
आरोप क्या है
ग्रामीणों का आरोप है कि *वर्तमान सरपंच और सचिव* ने सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए बिना ही *15वें वित्त योजना की राशि* से तालाब को पाटकर समतल कर दिया।
अन्य गंभीर आरोप:*फर्जी आहरण*: पंचायत निधि की राशि का दुरुपयोग कर समतलीकरण दिखाया गया
कोल माइंस की मिट्टी*: ओपन कास्ट माइंस से निकली मिट्टी लाकर तालाब में डलवाई गई
दोहरा लाभ*: एक तरफ शासकीय राशि का आहरण, दूसरी तरफ फ्री में मिली मिट्टी से काम
*ग्रामीणों की आपत्ति
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ शासन “पानी बचाओ” अभियान के तहत स्टॉप डैम, डबरी, तालाब, बांध और कुओं पर लाखों खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि ही जलस्रोत को खत्म कर रहे हैं।
तालाब पाटने से गांव के लोगों, पशुओं और खेती को सीधा नुकसान होगा।
*मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की *तत्काल जांच* कर दोषी सरपंच-सचिव के खिलाफ *वैधानिक कार्रवाई* की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य पंचायत में ऐसी पुनरावृति न हो।
जल संरक्षण के समय में जलस्रोत को पाटना गंभीर विषय है। प्रशासन को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।



