सिक्कों की ‘नो-एंट्री’ पर भड़का मानवाधिकार परिषद, कलेक्टर, एसपी को सौंपा ज्ञापन

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अनिल साहू

दुकानदारों की मनमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग; ₹1 और ₹2 के सिक्कों को बंद बताना कानूनी अपराध

सूरजपुर। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे सिक्कों को लेकर दुकानदारों द्वारा की जा रही मनमानी अब बड़े विवाद का रूप ले रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक (SP) को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है

अफवाहों का बाजार गर्म, आम जनता परेशान …

परिषद के जिला अध्यक्ष अब्दुल रब सिद्दीकी द्वारा सौंपे गए पत्र में बताया गया कि सूरजपुर जिला मुख्यालय सहित आसपास के कस्बों में व्यापारी और दुकानदार ₹1 और ₹2 के सिक्कों को लेने से साफ इनकार कर रहे हैं। दुकानदार यह भ्रामक दावा कर रहे हैं कि सरकार ने इन सिक्कों को बंद कर दिया है। इस बेबुनियाद अफवाह के कारण बाजार में अराजकता की स्थिति निर्मित हो गई है।

अपने ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु …

गरीबों पर मार, सिक्कों का लेनदेन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को हो रही है, जिनकी दैनिक खरीदारी में इन सिक्कों की बड़ी भूमिका होती है।

कानून का उल्लंघन, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या भारत सरकार ने इन सिक्कों को बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। वैध मुद्रा को स्वीकार न करना भारतीय मुद्रा का अपमान है, जो कानूनन दंडनीय अपराध है।

अराजकता का माहौल: दुकानदारों की जिद के कारण आए दिन ग्राहकों और व्यापारियों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है।

प्रशासन से जांच दल गठित करने की मांग …

मानवाधिकार परिषद ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द जांच दल गठित कर बाजारों का मुआयना करे। साथ ही, सार्वजनिक मुनादी या सूचना के माध्यम से जनता को स्पष्ट किया जाए कि सिक्के पूरी तरह वैध हैं। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि सिक्कों को लेने से मना करने वाले हठधर्मी दुकानदारों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो समस्या और विकराल हो सकती है।

यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के अधिकारों का हनन और कानूनी उल्लंघन है। हम चाहते हैं कि प्रशासन इस पर तत्काल ठोस कदम उठाए ताकि बाजार में मुद्रा का प्रचलन सामान्य हो सके।”

 

anil sahu
Author: anil sahu

जिला प्रतिनिधि सूरजपुर

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