

अनिल साहू
ढोडही और तालाब का दूषित पानी बना सहारा, भैयाथान के ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर/भैयाथान। एक तरफ देश “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहा है और सरकार “हर घर जल” योजना के जरिए विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक से ऐसी भयावह तस्वीर सामने आई है जिसने तमाम सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है।
भैयाथान ब्लॉक के ग्राम गोविंदगढ़ और बैजनाथपुर में ग्रामीण आज भी पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि आदिवासी परिवार अपनी प्यास बुझाने के लिए ढोडही (झरिया) और तालाब का गंदा व दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
गोविंदगढ़ के ग्रामीण जहां झरिया का मटमैला पानी उपयोग कर रहे हैं, वहीं बैजनाथपुर के आमापानी क्षेत्र के लोग तालाब के दूषित पानी के सहारे जिंदगी गुजार रहे हैं। भीषण गर्मी में जलस्रोत सूख चुके हैं और प्रशासनिक उपेक्षा ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
दूषित पानी बना जानलेवा खतरा, कभी भी फैल सकती है महामारी
ग्रामीणों द्वारा उपयोग किया जा रहा पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के दूषित पानी के सेवन से गांवों में कभी भी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

इन बीमारियों का बढ़ा खतरा :
*हैजा और कॉलरा*
*टायफाइड*
*पीलिया और हेपेटाइटिस*
*डायरिया (उल्टी-दस्त)*
*पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियां*
ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में वे हर दिन यही पानी पी रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों और बुजुर्गों की है, जिनकी सेहत लगातार बिगड़ने लगी है।
“पानी दो, नहीं तो आंदोलन होगा” — ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
लगातार अनदेखी से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। आदिवासी ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने साफ कहा— “सरकार सिर्फ कागजों में योजनाएं चला रही है। जमीनी हकीकत यह है कि हम गंदा पानी पीकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।”

PHE विभाग पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग और प्रशासनिक अमला मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा तक क्यों नहीं मिल पा रही है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गोविंदगढ़ और बैजनाथपुर के प्रभावित इलाकों में तत्काल टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए और स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसी बड़ी महामारी या जनहानि से पहले लोगों को राहत मिल सके।
अब सवाल यह है कि प्रशासन जागेगा या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार करेगा…?
Author: anil sahu
जिला प्रतिनिधि सूरजपुर



