स्वास्थ्य कर्मचारियों का सरकार पर सीधा हमला! “वादा नहीं, हक चाहिए”… निजीकरण पर रोक और लंबित मांगों के निराकरण की उठी जोरदार मांग

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अनिल साहू

मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा— 40% पद खाली, कर्मचारी परेशान, अब नहीं चली तो होगा बड़ा आंदोलन

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला शाखा सूरजपुर ने स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से लंबित मांगों, निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के खिलाफ सरकार के नाम बड़ा ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम कलेक्टर के माध्यम से दिए गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान का प्रस्ताव विभाग द्वारा पहले ही शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। वर्ष 2023 में इसी मांग को लेकर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन भी किया था। शासन से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया, लेकिन आज तक कर्मचारियों की मांगें फाइलों में ही दबी हुई हैं।

संघ ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अस्पतालों की लैब को निजी कंपनियों को सौंपने और अमृत फार्मेसी खोलने जैसे निर्णयों से कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर भारी असुरक्षा और नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी और आम जनता पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

ज्ञापन में यह भी चिंता जताई गई कि प्रदेश के बाहर से आने वाले चिकित्सक, नर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने से फर्जी डिग्री और फर्जी डिप्लोमा धारकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे। संघ ने मांग की है कि प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जाए।

संघ का दावा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसलिए स्वीकृत सेटअप के अनुसार तत्काल सीधी भर्ती शुरू करने, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन की नीति लागू करने, जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में एक समान मानदेय तय करने तथा आवश्यक कर्मचारियों के पद नियमित स्वीकृत करने की मांग की गई है।

संघ की प्रमुख मांगें

पुनरीक्षित वेतनमान का प्रस्ताव तत्काल लागू किया जाए।

स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए।

प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जाए।

स्वास्थ्य संस्थानों के 35–40% रिक्त पदों पर तत्काल सीधी भर्ती की जाए।

संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन की नीति लागू हो।

जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में एक समान मानदेय तय किया जाए।

आवश्यक संविदा कर्मचारियों के पद नियमित किए जाएं।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य आयोग का गठन किया जाए।

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने जल्द ही कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

anil sahu
Author: anil sahu

जिला प्रतिनिधि सूरजपुर