आस्था का महाकुंभ: रामगढ़ के पवित्र जल से कैलाश गुफा तक पहुंचा कांवड़ियों का कारवां

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भरत लाल गुप्ता

हजारों शिवभक्तों ने कांवर में भरा पवित्र जल, “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंजा रामगढ़

दो दशक से जारी है कैलाश गुफा जलाभिषेक की धार्मिक परंपरा, सामाजिक समरसता और आस्था का बन रहा प्रतीक

उदयपुर। सावन के पावन अवसर पर सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरा रामगढ़ में इस वर्ष भी आस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामगढ़ के छोटे तुर्रा से पवित्र जल लेकर हजारों कांवड़िया भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कैलाश गुफा की ओर रवाना हुए। कांवड़ियों के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

सुबह से ही रामगढ़ छोटे तुर्रा परिसर में शिवभक्तों का जुटना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पवित्र जल ग्रहण किया और उसे सुसज्जित कांवड़ में लेकर कैलाश गुफा की ओर प्रस्थान किया। भगवा वस्त्रों में सजे श्रद्धालु “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों सहित विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

चार पवित्र स्थलों से जल लेकर कैलाश गुफा में होगा जलाभिषेक

धार्मिक परंपरा के अनुसार इस आयोजन में श्रद्धालुओं द्वारा क्षेत्र के विभिन्न पवित्र जल स्रोतों से जल ग्रहण कर उसे कैलाश गुफा स्थित भगवान नाटेश्वर महादेव को अर्पित किया जाता है। इस वर्ष रामगढ़ नानतुर्रा, सारासोर जलप्रपात, श्रीकोट बेन गंगा एवं गहिरा सेतु बांध सहित चार प्रमुख स्थलों से पवित्र जल लेकर श्रद्धालु कैलाश गुफा पहुंचे हैं।

बताया गया कि श्रद्धालु सामूहिक रूप से जल लेकर निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान के तहत सोमवार, 23 अगस्त को भगवान नाटेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे। इसके लिए क्षेत्रभर के शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

दो दशक से अनवरत जारी है धार्मिक परंपरा

आयोजकों के अनुसार कैलाश गुफा में जलाभिषेक की यह धार्मिक परंपरा करीब 20 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। पिछले कई वर्षों से पलका निवासी अमरनाथ सिरदार, तपेसिया सिरदार सहित संत गहिरा गुरु के अनुयायी एवं अन्य श्रद्धालु इस धार्मिक कारवां को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं।

वर्ष 2016 से कांवड़ यात्रा को व्यापक स्वरूप देते हुए अमरनाथ सिरदार, तपेसिया सिरदार एवं संत गहिरा गुरु के अन्य अनुयायियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामगढ़ से कैलाश गुफा तक कांवड़ यात्रा में शामिल होते रहे हैं। समय के साथ यह यात्रा क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हो गई है।

कुवंरपुर शिव मंदिर में हुआ कांवड़ियों का स्वागत

कांवड़ यात्रा के दौरान लखनपुर नगर के कुवंरपुर स्थित शिव मंदिर में कांवड़ियों के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की गई। छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल एवं रवि अग्रवाल द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं जलपान की व्यवस्था की गई। उन्होंने कांवड़ियों का स्वागत करते हुए प्रसाद ग्रहण कराया तथा सावन के पावन अवसर पर सभी शिवभक्तों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने भगवान भोलेनाथ से सभी कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

रामगढ़ से कैलाश गुफा तक निकलने वाली यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और सामूहिक आस्था का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। संत गहिरा गुरु के अनुयायियों के साथ-साथ आसपास के गांवों से हजारों शिवभक्त इसमें सहभागी बनते हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन, सेवा और श्रद्धा का परिचय दिया। जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा कांवड़ियों के लिए पेयजल, प्रसाद एवं जलपान की व्यवस्था कर उनका स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहा।

श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति में निकाली जाने वाली यह यात्रा उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। कैलाश गुफा में पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक कर क्षेत्र, परिवार एवं समूचे समाज की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

रामगढ़ से कैलाश गुफा तक बहती यह आस्था की धारा आने वाली पीढ़ियों के लिए धार्मिक परंपरा, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति की प्रेरणादायी मिसाल बनती जा रही है।

anil sahu
Author: anil sahu