


बिना दस्तावेज 10 साल से चल रहा प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस बैंक
रामानुजनगर में कैशपार माइक्रो क्रेडिट का कारोबार, पंचायत NOC से लेकर RBI गाइडलाइन तक कुछ नहीं
रामानुजनगर/ सूरजपुर जिले के रामानुजनगर स्थित साप्ताहिक बाजार व धान मंडी के समीप किराए के एक निजी आवास में पिछले एक दशक से “कैशपार माइक्रो क्रेडिट” नामक संस्था बिना पूरे दस्तावेजों के संचालित की जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह संस्था गांव-गांव जाकर महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के नाम पर काम करती है।
सूत्रों के मुताबिक समूह की 10 से 15 महिलाओं को 30 से 50 हजार रुपये तक का ऋण दिया जाता है। इस ऋण की वसूली प्रति सप्ताह की जाती है और ऋण की अवधि 1 से 2 वर्ष की होती है।
दस्तावेजों के नाम पर शून्य
जब मीडिया की टीम ने ब्रांच मैनेजर करम चंद गुप्ता से संस्था के दस्तावेज मांगे तो ग्राम पंचायत की NOC, पैन कार्ड, कंपनी रजिस्ट्रेशन, GST, RBI की ऋण गाइडलाइन सहित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
मैनेजर ने कहा कि “प्रभार लेने के समय मुझे सीनियर अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया गया”।
सूत्रों ने यह भी बताया कि यहां कार्यरत सभी कर्मचारी मूलतः छत्तीसगढ़ के निवासी नहीं हैं और उनकी सूचना स्थानीय थाने में भी दर्ज नहीं कराई गई है।
मैनेजर ने बताया कि यह प्राइवेट कंपनी SBI से टाई-अप के तहत संचालित है और ग्राहकों का दुर्घटना बीमा भी किया जाता है,
जिससे कई लोगों को लाभ मिला है। हालांकि स्थानीय लोगों की शिकायत है कि यहां से कर्ज लेने पर ब्याज की दर काफी अधिक वसूली जाती है।
जांच का विषय
फिलहाल यह जांच का विषय है कि बिना RBI की अनुमति और अन्य वैधानिक दस्तावेजों के यह संस्था किस दर पर ब्याज वसूल रही है और किस नियम के तहत काम कर रही है, ताजुब की बात यह है की इतने वर्षो से चल रहे बैंक के साइन बोर्ड या बैंक प्रचारक बोर्ड नही है l






