सेवा संकल्प अभियान के तहत जवानों को मिला तनाव से निपटने का मंत्र, आत्महत्या रोकथाम पर हुई जागरूकता कार्यशाला

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अनिल साहू

सूरजपुर। सेवा संकल्प अभियान के तहत मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में जिला मानसिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, सिलफिली में “तनाव प्रबंधन एवं आत्महत्या रोकथाम हेतु गेटकीपर ट्रेनिंग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन तथा संकट की स्थिति में समय पर सहायता उपलब्ध कराने के प्रति जागरूक करना रहा।

कलेक्टर रेना जमील के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जवानों को तनाव के कारणों, उसके लक्षणों और तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

कार्यशाला में सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन, रिलैक्सेशन तकनीक, श्वास-व्यायाम तथा स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संकट के चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानने और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने के महत्व को भी समझाया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते परिवार, सहकर्मियों अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संवाद करना जरूरी है। प्रतिभागियों को आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों एवं जवानों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और अपने अनुभव साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित एवं सकारात्मक तरीके से सामना करने के उपाय बताए।

इस अवसर पर जिला चिकित्सालय सूरजपुर के मानसिक स्वास्थ्य दल से सचिन मातुरकर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, प्रियंका मंडल, सोशल वर्कर एवं मनोज कुमार, नर्सिंग ऑफिसर सहित 10वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल सिलफिली के अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आयोजित इस पहल की सराहना की और ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण है और समय पर संवाद एवं सहायता किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

anil sahu
Author: anil sahu

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