
अंतिम जांच रिपोर्ट में 4,409 बोरी खाद की कमी दर्ज, समिति प्रबंधक निलंबित; संतोषजनक जवाब न मिलने पर एफआईआर और कठोर कार्रवाई के संकेत

सूरजपुर। जयनगर सहकारी समिति में उर्वरक वितरण और भंडारण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर कराई गई संयुक्त जांच की अंतिम रिपोर्ट में लगभग 74 लाख रुपये मूल्य के 4,409 बोरी उर्वरक की कमी दर्ज की गई है। मामले में समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के साथ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला तब सामने आया जब जयनगर क्षेत्र के किसानों ने सामूहिक रूप से शिकायत कर आरोप लगाया कि समिति में उर्वरक वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी की जा रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रेना जमील ने उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं अनिल कुमार बनज को विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
एक सप्ताह तक चली संयुक्त जांच, रिकॉर्ड और स्टॉक का मिलान
कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने लगभग एक सप्ताह तक समिति के अभिलेखों, ऋण पुस्तिकाओं, स्टॉक रजिस्टर और गोदाम में उपलब्ध उर्वरक का सूक्ष्म परीक्षण किया। जांच के दौरान दस्तावेजों और वास्तविक स्टॉक का बारीकी से मिलान किया गया।
उप पंजीयक अनिल कुमार बनज के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि समिति को वितरण के लिए 10,815 बोरी उर्वरक प्राप्त हुआ था। इनमें से 6,406 बोरी किसानों को वितरित की गई, जबकि 4,409 बोरी उर्वरक का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के अनुसार इस कमी का अनुमानित मूल्य लगभग 74 लाख रुपये है।
उप पंजीयक ने बताया कि समिति प्रबंधक को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक और स्पष्ट जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तथा कलेक्टर के निर्देशानुसार कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड में छेड़छाड़ रोकने के लिए तत्काल निलंबन
जांच के दौरान अभिलेखों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में संभावित छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
85 लाख के पुराने धान घोटाले की फाइल भी खुल सकती है
सूत्रों के अनुसार श्यामलाल प्रजापति का नाम पूर्व में लगभग 85 लाख रुपये के धान घोटाले में भी सामने आ चुका है, जिसमें उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हुई थी। अब नए उर्वरक घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासन पुराने धान घोटाले के प्रकरण की भी पुनः समीक्षा कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो सकता है।
किसानों का आक्रोश: ‘सिर्फ निलंबन नहीं, स्थायी बर्खास्तगी हो’
जयनगर क्षेत्र के किसानों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों में बार-बार सामने आने वाले भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित समिति प्रबंधक के विरुद्ध स्थायी बर्खास्तगी, एफआईआर और आर्थिक नुकसान की वसूली जैसी कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि सहकारिता व्यवस्था में किसानों का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।
अब पूरे जिले की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच के आधार पर एफआईआर और कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो यह न केवल जयनगर नही बल्कि जिले की अन्य सहकारी समितियों के लिए भी जवाबदेही और पारदर्शिता का सख्त संदेश साबित हो सकता है।




