स्टापडेम औचित्यहिन् निर्माण अधिकारी मौन

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CG आजतक  न्यूज़

ब्यूरो अंबिकापुर सरगुजा 

 

सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत बरबसपुर मे महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत स्टाप डेम निर्माण की प्रसासनिक स्वीकृति मिला था

,स्टाप डेम की स्वीकृति राशि लगभग 1370 लाख प्रदाय किया गया,

जिसमे निर्माण एजेंसी का दायित्व ग्राम पंचायत को दिया गया था,

किन्तु निर्माण एजेंसी व तकनीकी सहायक के रहमोकरम से स्टाप डेम का निर्माण इस तरह कराया गया है जो इतिहासिक तरीके से कार्य कराया गया जो काबिले तारीफ़ हैँ,

विदित हो की ग्राम पंचायत बरबसपुर के बरन नाला मे छोटेलाल  के खेत स्थित  स्टाप डेम की प्रसासनिक स्वीकृति इस उद्देश्य से किया गया था की किसानों को स्टाप डेम के

आस पास के किसानों को क़ृषि संबंधित सिचाई मे काफी अच्छा राहत मिलेगा साथ ही गांव के लोगों को विभिन्न प्रकार के तीज त्यौहार व दासंस्कार, निस्तार की व्यवस्था होगा

उपरान्त स्नान और कपड़े धोने से लेकर प्यासे पशु पक्षी को भी पानी नसीब होगा

लेकिन यहां पर निर्माण कार्य भी हुए लेकिन विपरीत तरीके से कराया जाना दुर्भाग्य है की तकनीकी सहायक द्वारा निर्माण स्थल मे मात्र ले आउट देने पहुँचे और सीधे निर्माण बाद नाप करने पहुँचे जिससे मूल्यांकन मे उन्हें दिकत न हो, और ऐसा ही किया गया जिससे निर्माण एजेंसी द्वारा मनमानी तरीके से प्रकालन को ताक मे रखकर बेखौफतरीके से निर्माण कराया जाना बताया जाता हैँ 

स्टाप डेम निर्माण मे उसी नाले के मिट्टी युक्त रेता का भरपूर उपयोग किया गया हैँ

, गिट्टी की जगह मे हाथ से तोड़ने की गिट्टी भी नहीं लगया बल्कि छोटी छोटी पहाड़ी नुमा डोगरी से गिट्टीयो को लेबरों से बिनवाकर डाला गया हैँ, इतना ही नहीं ज़ब स्टाप डेम बनाने से पूर्व नीव की खुदाई स्टीमेट से हटकर खुदाई हुई हैँ मात्र तीन फिट की नीव खुदाई कर बनाया गया डेम मे कितना गुणवत्ता हो सकता हैँ यह भी जांच का बिषय है,

उल्लेखनीय हैँ की तकनीकी सहायक के कमीशन खोरी व एस डीओ के द्वारा ऑफिस मे बैठकर सत्यापन करना भी एक अशोभनीय कृत्य को इंगित करता हैँ,

हैरानी की बात यह हैँ की प्राकलन मे मटेरियल मे कमश 1,2,3 की जगह मे 1,6,8, का मशाला उपयोग किया गया हैँ जिससे स्टाप डेम एक ताजमहल की भांति दिख रहा हैँ किन्तु अंदर से खोखला साबित हो रहा हैँ, ग्रामीणों ने बताया की निर्माण एजेंसी तेरह लाख सत्तर हजार के स्टाप डेम को एक महीने मे कम्प्लीट कराकर मुलयाकन सत्यापन तक करा लिया लेकिन कमीशन के आगे नियम सिस्टम सब बेकार हैँ,

आज की स्तिथि मे स्टाप डेम मे प्लास्टर को हाथ पाँव लगाते ही झड़ रहा हैँ जबकि स्टाप डेम निर्माण हो या कोई भी निर्माण हो पानी की तराई अत्यंत जरूरी हैँ लेकिन निर्माण एजेंसी और टेक्निकल अधिकारियों की मिली भगत का खामिया बरसात के दिनों मे देखने को मिलेगा, बताया जाता हैँ की औचित्य हिन् निर्माण से ग्रामीणों मे भी काफी रोष व्याक्त किया

लेकिन दबँग सरपंच की उची पहुंच पकड़  अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण गुणववत्ताविहीन स्टाप डेम का निर्माण कराया गया हैँ

जिसमे रेता गिट्टी छड सहित सामाग्री का उपयोग प्रयोग सिमित किया गया

मटेरियल भी घटिया स्तर का लगाया गया जो बिलकुल ही दैनिय स्तिथि हैँ, बताया जाता हैँ की एक बरसात भी अगर ठीक जाए तो कोई गॉड गिफ्ट ही होगा तब ही यह डेम स्थाई रूप से बच पायेगा, इसतरह से औचित्य हिन् घटिया कार्यों का बिना निरीक्षक के ही रूम और ऑफिसो मे बैठकर मूल्यांकन और सतयापन कर दिया जाता हैँ जिससे निर्माण एजेंसी बेखौफ होकर गांव मे निर्माण कायों को अंजाम तक पहुंचा रहे लेकिन शीर्ष मे बैठे अधिकारियों के द्वारा ऐसे मामलो पर वैधानिक कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण ही भ्रस्टाचार आज चरम पर पहुँचता जा रहा हैँ

अगर ऐसा ही हाल रहा तो शाशन के राशि का दुरूपयोग इसी तरह होता रहेगा,

ग्रामीणों ने ऐसे निक्क्मे तकनीकी सहायको के विरूद्ध जांच कर वैधानिक कार्यवाही करते हुए राशि की वसूली कराने की भी मांग किया है l

Aashiq khan
Author: Aashiq khan

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